सच्चाई लिखना अपराध?’ पत्रकार पर मुकदमे से भड़का आक्रोश ,खटीमा के पत्रकार के समर्थन में उठी आवाज

हरिद्वार, 30 मार्च । प्रदेश में पत्रकारों के बढ़ते उत्पीड़न और चौथे स्तंभ की आवाज को कुचलने के प्रयासों के विरुद्ध हरिद्वार के पत्रकार जगत ने एकजुट होकर मोर्चा खोल दिया है। खटीमा (ऊधमसिंह नगर) के वरिष्ठ पत्रकार दीपक फुलेरा के विरुद्ध ‘प्रतिशोध की भावना’ से दर्ज किए गए मुकदमे के विरोध में आज हरिद्वार के प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के पत्रकारों ने संयुक्त हस्ताक्षर युक्त ज्ञापन मुख्यमंत्री, पुलिस महानिदेशक और महानिदेशक सूचना को ई-मेल के माध्यम से प्रेषित किया।

जनहित की खबर छापना बना ‘अपराध’!

विज्ञप्ति में कहा गया है कि वरिष्ठ पत्रकार दीपक फुलेरा ने विगत 27 मार्च 2026 को खटीमा क्षेत्र में गैस आपूर्ति की भारी किल्लत और उपभोक्ताओं की समस्याओं पर एक तथ्यात्मक ‘ग्राउंड रिपोर्ट’ प्रकाशित की थी। प्रशासन ने अपनी कमियां सुधारने के बजाय, सच्चाई को दबाने के उद्देश्य से पत्रकार के विरुद्ध आनन-फानन में एफआईआर दर्ज कर दी।

लोकतंत्र के लिए दुर्भाग्यपूर्ण है दमनकारी कार्रवाई

पत्रकारों ने कड़ा रोष व्यक्त करते हुए कहा कि 18 वर्षों से निष्पक्ष और जनपक्षीय पत्रकारिता कर रहे एक सम्मानित पत्रकार के विरुद्ध बिना किसी ठोस साक्ष्य और जांच के मुकदमा दर्ज करना सीधे तौर पर ‘पुलिसिया तानाशाही’ और ‘लोकतंत्र की हत्या’ है। राजनैतिक दबाव में की गई इस कार्रवाई से प्रदेश भर के पत्रकारों में भारी आक्रोश है।

मुख्यमंत्री से की गई प्रमुख मांगें:

ज्ञापन के माध्यम से पत्रकारों ने मुख्यमंत्री से निम्नलिखित बिंदुओं पर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है:

मुकदमा निरस्त हो: वरिष्ठ पत्रकार दीपक फुलेरा के विरुद्ध दर्ज ‘फर्जी’ और भ्रामक मुकदमे को तत्काल प्रभाव से निरस्त करने हेतु संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया जाए।

राजपत्रित अधिकारी से पहले हो जांच: राज्य में पत्रकारों के विरुद्ध किसी भी शिकायत पर तब तक मुकदमा दर्ज न किया जाए, जब तक कि किसी राजपत्रित अधिकारी स्तर पर उसकी गहन एवं निष्पक्ष जांच न कर ली जाए।

सुरक्षित वातावरण की गारंटी: जनहित के मुद्दों को निडरता से उठाने वाले पत्रकारों को सुरक्षा और भयमुक्त वातावरण प्रदान किया जाए।

तमाम पत्रकार संगठनों ने की तीखी आलोचना

हरिद्वार के पत्रकारों के इस अभियान को विभिन्न प्रदेश स्तरीय पत्रकार संगठनों का भी पुरजोर समर्थन मिला है। संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि पत्रकार उत्पीड़न की यह प्रवृत्ति नहीं रुकी, तो पूरे प्रदेश में पत्रकार सड़कों पर उतरकर उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।

पत्रकारों ने उम्मीद जताई है कि न्यायप्रिय मुख्यमंत्री इस गंभीर प्रकरण का संज्ञान लेकर पत्रकारिता की गरिमा की रक्षा करेंगे और दोषी अधिकारियों के विरुद्ध भी कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित करेंगे।

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