खटीमा में रामलीला कार्यक्रम में शामिल हुए मुख्यमंत्री धामी, श्रीराम के आदर्शों को जीवन में अपनाने का किया आह्वान

मुख्यमंत्री  पुष्कर सिंह धामी ने आज खटीमा के नगला तराई में आयोजित रामलीला कार्यक्रम में प्रतिभाग किया। इस अवसर पर उन्होंने भगवान श्रीराम के जीवन चरित्र को नमन करते हुए जनमानस से उनके उच्च आदर्शों, मर्यादा और नैतिक मूल्यों को अपने जीवन में अपनाने का आह्वान किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम का जीवन संपूर्ण मानवता को एकजुट होकर धर्म, सत्य और नैतिकता के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।

​कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने राज्य सरकार की प्राथमिकताओं को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि देवभूमि उत्तराखंड की पवित्रता, समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और धार्मिक धरोहरों को सहेजने के लिए सरकार पूरी दृढ़ता और प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में श्री केदारनाथ धाम के पुनर्निर्माण के साथ-साथ केदारखंड और मानसखंड मंदिर माला मिशन के तहत पौराणिक मंदिरों के जीर्णोद्धार का कार्य तीव्र गति से आगे बढ़ रहा है।

​मुख्यमंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि प्रदेश की पवित्रता, शांति और सांस्कृतिक पहचान से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा। राज्य सरकार अवैध अतिक्रमणों को हटाने और छद्म वेशधारियों के खिलाफ निरंतर कड़े कदम उठा रही है।

​प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में बीते 12 वर्षों में हुए ऐतिहासिक कार्यों का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार समाज के अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति के सशक्तिकरण के लिए समर्पित है।

​जनकल्याणकारी योजनाएं: गरीबों को पक्के मकान, हर घर नल से जल, और मुफ्त गैस कनेक्शन उपलब्ध कराए गए हैं। आयुष्मान भारत योजना के तहत गरीबों के लिए 5 लाख रुपये तक का इलाज पूरी तरह मुफ्त किया गया है।

​महिला व युवा सशक्तिकरण: महिलाओं को ‘लखपति दीदी’ और ‘ड्रोन दीदी’ जैसी महत्वाकांक्षी योजनाओं से जोड़कर स्वावलंबी बनाया जा रहा है, वहीं युवाओं के लिए स्किल डेवलपमेंट पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

​किसान व सैनिक कल्याण: किसानों को आर्थिक संबल देने के लिए ‘किसान सम्मान निधि’ दी जा रही है। देश की सीमाओं को सुरक्षित करने के लिए सैनिकों को आधुनिक सुविधाएं प्रदान की गई हैं और सर्जिकल व एयर स्ट्राइक जैसे सख्त निर्णय लिए गए हैं। इसके अलावा पूर्व सैनिकों की लंबे समय से लंबित ‘वन रैंक, वन पेंशन’ की मांग को पूरा किया गया है।

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