मनोज नौडियाल
सरकारी भूमि पर नगरनिगम और राजस्व विभाग की भूमि पर अतिक्रमण में सहयोगी अधिकारी कर्मचारियों में हड़कंप
आरटीआई कार्यकर्ता और समाजसेवी मुजीब नैथानी की कोटद्वार शहर की अतिक्रमण युक्त भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराने की मुहिम ने अपना असर दिखाना शुरू कर दिया। गौरतलब है कि कुछ वर्ष पूर्व सूचना आयोग के निर्देशों पर फुटपाथ पर अतिक्रमण चिन्हित किए गए थे ,और माननीय हाई कोर्ट नैनीताल ने उक्त अतिक्रमण हटाने के आदेश दिए थे। मगर हाई कोर्ट के आदेश के बाद फुटपाथ से अतिक्रमण हटाने के बजाय निगम के अधिकारियों द्वारा यह अडंगा/पेंच लगा दिया गया था कि इसमें से कुछ लोगों के पट्टों को फ्री होल्ड करते समय उक्त फुटपाथ को भी फ्री होल्ड कर दिया गया है, ऐसे में उनको कैसे हटाया जाएगा …. ? जिस पर मुजीब नैथानी की शिकायत पर एक कमेटी का गठन वर्ष 2020 में किया गया और उक्त फुटपाथों पर अतिक्रमण की पुनः जांच की गई । जिसमें जांच अधिकारियों के द्वारा उल्लेखित किया गया कि नजूल नीति में स्पष्ट है कि किसी भी सार्वजनिक स्थल की भूमि नाली फुटपाथ आदि को फ्री होल्ड नहीं किया जाएगा और अतिक्रमण को हटाया जाएगा। उक्त जांच में अधिकारियों द्वारा यह लिख दिया गया कि उक्त फ्रीहोल्ड नीति के अनुरूप फ्री होल्ड किए गए हैं । जिस पर शासन ने जिलाधिकारी गढ़वाल से भेजी गई जांच आख्या में यह स्पष्टीकरण चाहा कि पट्टे से अतिरिक्त जो भूमि फ्री होल्ड की गई है क्या वह सार्वजनिक स्थल की भूमि है कि नहीं, यह स्पष्ट करें ।इस मामले में निगम के अधिकारियों के साथ साथ शासन के अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध नजर आ रही है क्योंकि पूर्व में ही निगम अधिकारी लिख चुके हैं कि फुटपाथ की भूमि को फ्री होल्ड कर दिया गया है इसी वजह से माननीय हाई कोर्ट के आदेश पर भी अतिक्रमण नहीं हटाया गया है।
ऐसे में जब स्पष्ट है कि फ्री होल्ड की गई भूमि फुटपाथ है, जो कि सार्वजनिक उपयोग की भूमि है और लिपिक द्वारा टाइप करते वक्त गलती से लिख दिया गया कि फ्री होल्ड नीति के अनुरूप ही फ्री होल्ड किया गया है , उसके बावजूद मामले को लटकाने के लिए फिर से कमेटी बना दी गई है। इस तरह यह मामला 2 साल से लटका हुआ है। जबकि मुजीब नैथानी का कहना है कि उक्त मामले में अतिक्रमणकारियों एवम निगम के अधिकारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज होना चाहिए जिन्होंने सार्वजनिक उपयोग की भूमि को फ्री होल्ड करने की संस्तुति दी है। साथ ही मुजीब नैथानी ने आरोप लगाया कि निगम आयुक्त पट्टे वालों से भी फुटपाथ खाली नहीं करवा पा रहे हैं,व अतिक्रमण जैसे जघन्य अपराध को बढ़ावा देने पर तुले हैं।