उत्तराखंड के छोटे शहरों तक पहुंचेगा सिनेमा, मोबाइल थिएटर में दिखाई जाएगी विनोद कापड़ी की फिल्म ‘पायर’

देहरादून। उत्तराखंड के पहाड़ों की जिंदगी, पलायन का दर्द और अपनों के इंतजार की भावनात्मक कहानी अब उन दर्शकों तक भी पहुंचेगी, जहां सिनेमा देखने के लिए पारंपरिक सिनेमाघर उपलब्ध नहीं हैं। फिल्मकार विनोद कापड़ी अपनी आगामी फिल्म ‘पायर (चिता)’ को मोबाइल थिएटर के माध्यम से उत्तराखंड के छोटे शहरों तक ले जा रहे हैं। इस पहल के तहत 14 से 17 अक्टूबर के बीच बेरीनाग, बागेश्वर और श्रीनगर गढ़वाल में फिल्म के विशेष प्रदर्शन आयोजित किए जाएंगे।

फिल्म के ये विशेष प्रदर्शन पिक्चरटाइम की मोबाइल थिएटर पहल के जरिए किए जाएंगे। इसका उद्देश्य उन क्षेत्रों में बड़े पर्दे पर सिनेमा देखने का अनुभव उपलब्ध कराना है, जहां स्थायी सिनेमाघरों की सुविधा सीमित है या बिल्कुल नहीं है। इस पहल से पहाड़ के स्थानीय दर्शकों को अपने ही परिवेश और जीवन से जुड़ी कहानी बड़े पर्दे पर देखने का अवसर मिलेगा।

पहाड़ की कहानी, पहाड़ के लोगों तक पहुंचाने की पहल

फिल्मकार विनोद कापड़ी का मानना है कि सिनेमा केवल बड़े शहरों और मल्टीप्लेक्स तक सीमित नहीं रहना चाहिए। उनकी कोशिश है कि उत्तराखंड के छोटे शहरों में रहने वाले लोग भी बड़े पर्दे पर अपनी जिंदगी और आसपास के समाज से जुड़ी कहानियां देख सकें।

विनोद कापड़ी के अनुसार, ‘पायर’ पहाड़ों और वहां रहने वाले लोगों की कहानी है। वह चाहते हैं कि खासकर उन छोटे शहरों के दर्शक, जहां सिनेमाघर नहीं हैं, इस फिल्म को बड़े पर्दे पर देखने का अनुभव हासिल कर सकें। उनका कहना है कि दर्शकों के शहरों तक पहुंचने का इंतजार करने के बजाय फिल्म को खुद उनके पास ले जाना इस पहल का उद्देश्य है। उन्हें उम्मीद है कि दर्शक फिल्म में अपने जीवन, परिवार और भावनाओं की झलक महसूस करेंगे।

पलायन और अपनों के इंतजार की मार्मिक कहानी है ‘पायर’

उत्तराखंड के पहाड़ों की पृष्ठभूमि पर बनी ‘पायर’ एक बुजुर्ग दंपती की संवेदनशील कहानी है। उनके बच्चे बेहतर अवसरों और भविष्य की तलाश में शहरों की ओर पलायन कर चुके हैं, जबकि बुजुर्ग दंपती अपने शांत जीवन में उनकी वापसी का इंतजार करते रहते हैं।

फिल्म के जरिए अकेलेपन, बढ़ती उम्र, पहाड़ों से पलायन और रोजगार व बेहतर जीवन की तलाश में परिवारों से दूर होने के भावनात्मक पहलुओं को सामने लाया गया है। यह कहानी उन परिवारों की परिस्थितियों को भी दर्शाती है, जिनमें बेहतर भविष्य की उम्मीदें कभी-कभी अपनों से दूरी का कारण बन जाती हैं।

मोबाइल थिएटर से मिलेगा बड़े पर्दे का अनुभव

पिक्चरटाइम का मोबाइल थिएटर मॉडल प्रोजेक्शन और साउंड जैसी सुविधाओं से लैस पोर्टेबल सिनेमाई अनुभव उपलब्ध कराता है। इसके माध्यम से ऐसे क्षेत्रों में भी फिल्मों का प्रदर्शन संभव होता है, जहां स्थायी सिनेमाघर मौजूद नहीं हैं।

‘पायर’ के विशेष प्रदर्शन इस लिहाज से महत्वपूर्णहैंकि फिल्म की कहानी उत्तराखंड के स्थानीय जीवन, संस्कृति और सामाजिक परिस्थितियों से गहराई से जुड़ी हुई है। छोटे शहरों तक फिल्म पहुंचने से स्थानीय दर्शकों को अपनी जिंदगी से मिलती-जुलती कहानी देखने और उससे भावनात्मक जुड़ाव महसूस करने का अवसर मिलेगा।

यह पहल फिल्म वितरण के पारंपरिक ढांचे से आगे बढ़ते हुए सिनेमा को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने का प्रयास है। इससे उन दर्शकों तक भी फिल्में पहुंच सकतीहैं,जिनके लिए बड़े शहरों के सिनेमाघरों तक जाना आसान नहीं होता।

   30 अक्टूबर को हिंदी और मलयालम में होगी रिलीज

विनोद कापड़ी की फिल्म ‘पायर (चिता)’ 30 अक्टूबर को हिंदी और मलयालम भाषाओं में सिनेमाघरों में रिलीज होगी। इससे पहले उत्तराखंड के बेरीनाग, बागेश्वर और श्रीनगर गढ़वाल में होने वाले विशेष प्रदर्शन फिल्म को स्थानीय दर्शकों तक पहुंचाने की दिशा में अहम कदम माने जा रहे हैं।

फिल्म की कहानी पहाड़ों से जुड़ी उन भावनाओं को सामने लाती है, जिनमें परिवार, पलायन, अकेलापन और अपनों के लौटने की उम्मीद एक-दूसरे से गहराई से जुड़ी हुई हैं। मोबाइल थिएटर के जरिए इन कहानियों को पहाड़ के लोगों तक पहुंचाने की यह पहल सिनेमा को मनोरंजन के साथ-साथ सामाजिक अनुभवों से जोड़ने का प्रयास भी है।

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