कोटद्वार । नगर निगम क्षेत्र के वार्ड नंबर12स्थित राजकीय प्राथमिक विद्यालय नंबर -4में बुधवार गढ़भोज कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में कक्षा एक से पांच तक के बच्चों को पारंपरिक पहाड़ी व्यंजनों,उनके पोषक तत्वों और स्थानीय खाद्यान्नों के महत्व की जानकारी दी गईइस दौरान विद्यालय का माहौल गढ़वाली संस्कृति और लोक परंपराओं के रंग में रंगा नजर आया।कार्यक्रम की खास बात यह रही कि विद्यालय की प्रधानाचार्या सुनीता डंडरियाल स्वयं गढ़वाली पारंपरिक वेशभूषा और आभूषण पहनकर पहुंचीं।

उन्होंने सभी आगंतुकों से भी पारंपरिक गढ़वाली पहनावे और गहनों के साथ कार्यक्रम में शामिल होने का आग्रह किया, ताकि नई पीढ़ी अपनी लोक संस्कृति, परंपराओं और पारंपरिक वेशभूषा से जुड़ सके।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि वार्ड नंबर 12 की पार्षद श्रीमती आरती खर्कवाल रहीं। इस अवसर पर सीआरसी से कुमारी शीतल कश्यप भी मौजूद रहीं। लोक गायिका शकुंतला बुढाकोटी तथा श्रीमती शांति और पूजा देवलीयाल की टीम ने मंगलगीत, चौंफला और खुदेड़ गीतों की मनमोहक प्रस्तुतियां देकर कार्यक्रम में लोक संस्कृति की छटा बिखेरी।
गढ़भोज के तहत गहथ का फाणु, कद्दू की सब्जी, खीर सहित विभिन्न पारंपरिक पहाड़ी व्यंजन तैयार किए गए। बच्चों को इन व्यंजनों के पोषण संबंधी गुणों के बारे में बताया गया। साथ ही स्थानीय मोटे अनाजों (मिलेट्स) और पारंपरिक खाद्य पदार्थों को भोजन में शामिल करने के महत्व से भी अवगत कराया गया।
प्रधानाचार्या सुनीता डंडरियाल ने कहा कि गढ़भोज केवल भोजन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह अपनी जड़ों की ओर लौटने, पारंपरिक खानपान को संरक्षित करने और स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने का एक सार्थक प्रयास है। उन्होंने कहा कि स्थानीय अनाजों और पारंपरिक व्यंजनों का संरक्षण ‘वोकल फॉर लोकल’ की भावना को मजबूत करता है। मौसम और जलवायु के अनुरूप भोजन करना स्वास्थ्य के लिए लाभकारी होता है तथा पारंपरिक पहाड़ी व्यंजन पौष्टिक आहार का महत्वपूर्ण विकल्प हैं।

प्रधानाचार्या ने कार्यक्रम के सफल आयोजन में सहयोग के लिए भोजनमाता श्रीमती आशा देवी और मोनिका देवी का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम के माध्यम से बच्चों को अपनी संस्कृति, पारंपरिक खानपान और लोक विरासत के प्रति जागरूक करने का संदेश दिया गया।